Ajay Kandewar,Wani:- वणी तालुका एक बार फिर अवैध रेती उत्खनन के गंभीर आरोपों से हिल गया है। बेलोरा घाट परिसर में नियम-कायदों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं.उत्खनन की तय सीमा, समय, वाहन संख्या और पर्यावरणीय शर्तें सब कुछ ताक पर। हैरानी यह कि दो-दो भारी मशीनें लगातार चलती रहीं, शिकायतें होती रहीं, मगर वणी तहसीलदार का मौन टूटने का नाम नहीं ले रहा। यह मौन प्रशासनिक लापरवाही है या संरक्षन.यह सवाल अब आग की तरह फैल चुका है।
इसी पृष्ठभूमि में विजय चोरडिया ने निर्णायक कदम उठाते हुए ऐलान किया है कि ,वे नागपुर खंडपीठ में रीतसर शिकायत ठोस सबूतों के साथ दाखिल करेंगे। चोरडिया का तेवर साफ है“कानून को रौंदने वालों और आंखें मूंदे बैठे अफसरों की जवाबदेही तय होकर रहेगी।” इस साहसी पहल से वे जनता की आवाज़ बनकर उभरे हैं और अवैध धंधों के खिलाफ फ्रंटफुट पर लड़ने वाले नेता के रूप में तेजी से चर्चित हो रहे हैं।सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिकायत दर्ज होने के बाद भी वरिष्ठ प्रशासन ने कार्रवाई क्यों नहीं की?क्या नियम सिर्फ कागज़ों तक सीमित हैं?
क्या तहसीलदार की निष्क्रियता पर ऊपर से कोई ढाल तनी हुई है.यदि सब कुछ स्पष्ट था, तो मशीनें जब्त क्यों नहीं हुईं, जिम्मेदारों पर एफआईआर क्यों नहीं हुई, और घाट को सील क्यों नहीं किया गया?क्या वणी में कानून से बड़ा कोई और तंत्र चल रहा है?विजय चोरडिया की नागपुर खंडपीठ की ओर बढ़ती यह कानूनी लड़ाई अब सिर्फ एक तहसीलदार तक सीमित नहीं रही; यह पूरे प्रशासनिक तंत्र की परीक्षा है। अब वरिष्ठ अधिकारी इस बदनामी और सवालों के तूफान में जवाबदेही तय करते हैं या फिर चुप्पी की दीवार और ऊँची करते हैं।

