Wednesday, July 15, 2026
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वणी तहसीलदार को एक साल का एक्सटेंशन क्यों? 

Ajay Kandewar,Wani:- वणी तहसीलदार का तीन वर्षों का कार्यकाल पूरा हो चुका है, इसके बावजूद मंत्रालय से एक वर्ष का अतिरिक्त कार्यकाल (एक्सटेंशन) मिलने पर अब पूरे वणी तालुका में तीव्र असंतोष देखने को मिल रहा है। वणी तहसील को लेकर पहले से ही “मलाईदार तहसील” होने की खुली चर्चा चलती रही है, और ऐसे में यहां पदस्थ अधिकारी का किसी भी हाल में तबादला न चाहना.अपने आप में कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

स्थानीय नागरिकों के बीच यह चर्चा अब तेज हो गई है कि आखिर यह एक्सटेंशन किस उद्देश्य से लिया गया है.जनता की सेवा के लिए या फिर अवैध रेत तस्करी से जुड़े तत्वों को अप्रत्यक्ष संरक्षण देने के लिए? यह सवाल इसलिए भी उठ रहा है क्योंकि शिरपुर पुलिस स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत बेलोरा घाट में लंबे समय से अवैध रेत उत्खनन खुलेआम जारी है। नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, लेकिन तहसील प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई है। इतने गंभीर मामले उजागर होने के बावजूद यदि प्रशासन मौन साधे बैठा है, तो यह चुप्पी संदेह को और गहरा करती है। नागरिकों के बीच यह सवाल आम हो गया है कि क्या तहसीलदारों ने “मुझे क्या?” जैसी निष्क्रिय भूमिका अपना ली है? या फिर कार्रवाई न होने के पीछे कोई और वजह है, जिस पर परदा डाला जा रहा है? इसी पृष्ठभूमि में शिंदे सेना के नेता विजय चोरडिया ने प्रशासन को सीधा और स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है।

शिंदे सेना के नेता विजय चोरडिया बयान……

“तहसीलदार ने एक्सटेंशन क्यों लिया, यह बात उन्हें जनता के सामने स्पष्ट करनी चाहिए। अगर यह एक्सटेंशन वास्तव में जनहित में है, तो बेलोरा घाट में अब तक एक भी ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और अगर कार्रवाई नहीं हो रही है, तो जनता यह मानने को मजबूर होगी कि यह एक्सटेंशन अवैध रेत माफियाओं को संरक्षण देने के लिए लिया गया है। यदि प्रशासन ने तत्काल तहसीलदार और संबंधित मंडल अधिकारियों को निलंबित नहीं किया, तो वणी में शिवसेना स्टाइल में सड़क पर उतरकर तीव्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

”एक्सटेंशन, प्रशासनिक चुप्पी और लगातार निष्क्रियता इन तीनों वजहों से तहसीलदार की भूमिका अब जनता के संदेह के घेरे में आ चुकी है।वणी तहसील आखिर जनता के लिए है या रेत माफियाओं के लिए?यह सवाल अब केवल चर्चा तक सीमित न रहकर, आंदोलन की ओर तेज़ी से बढ़ता दिखाई दे रहा है।

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