Ajay Kandewar,Wani:- वेकोली में अब मामला सिर्फ एक आरोपी का नहीं, पूरे सिस्टम की साख का बन गया है। 15 अक्टूबर को वणी थाने में अपहरण और छेड़छाड़ का मामला दर्ज हुआ, और लोग कार्रवाई का इंतजार करते रह गए। लेकिन हैरानी तब और बढ़ी जब 17 मार्च को फिर एक महिला एडवोकेट सोनिया गजभिये ने उसी सुनील मोहितकर के खिलाफ शिरपुर थाने में छेड़छाड़, धमकी और मारपीट की शिकायत दर्ज कराई। सवाल साफ है.आखिर एक ही व्यक्ति पर बार-बार आरोप लग रहे हैं, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं?
अब निशाना सिर्फ सुनील मोहितकर नहीं, बल्कि उसे बचाने वाले युनियन के “बड़े साहब” भी हैं। इलाके में खुलकर चर्चा है कि कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी उसके पीछे खड़े हैं, इसलिए उसकी कुर्सी हिल नहीं रही। अगर आरोप आम कार्यकर्ता पर होते, तो क्या अब तक कार्रवाई नहीं हो जाती? क्या युनियन में नियम सिर्फ कमजोरों के लिए हैं?
महिलाओं का गुस्सा अब फूट पड़ा है। उनका कहना है कि यह सिर्फ चुप्पी नहीं, बल्कि खुला समर्थन है। युनियन अध्यक्ष और उनके वरिष्ठों पर सीधा आरोप लग रहा है कि वे एक आरोपी को बचा रहे हैं। “महिलाओं की इज्जत से बड़ा क्या किसी की कुर्सी है?”यह सवाल अब हर जगह गूंज रहा है।अब चेतावनी भी साफ है अगर तुरंत सुनील मोहितकर को पद से नहीं हटाया गया और उसे संरक्षण देने वालों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो कुछ महिलाओ का उग्र रूप धारण होगा। वेकोली में अब महिलाएं चुप बैठने वाली नहीं हैं। यह लड़ाई अब एक आरोपी के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के खिलाफ बनती जा रही है।

