Ajay kandewar,Wani :- शहर के सिंधी कॉलोनी स्थित श्री.सिंध सेवा दुर्गोत्सव मंडल ने इस वर्ष जो नवदुर्गा प्रतिमाएँ स्थापित की हैं, वे केवल पारंपरिक रीति-रिवाज या सजावट तक सीमित न होकर, सजीवता और दिव्यता का अद्वितीय उदाहरण बन गई हैं। नवरात्रि के नौ दिनों में देवी के नौ रूप जिस प्रभावी ढंग से भाविकों के समक्ष प्रस्तुत किए गए हैं, उसे देखकर दर्शनार्थियों को मानो प्रत्यक्ष देवदर्शन का अनुभव होता है।

मूर्तियों के चेहरे पर झलकते भाव, नेत्रों में चमकता दिव्य तेज और सम्पूर्ण स्वरूप में व्याप्त जीवंतता, हर भक्त को मंत्रमुग्ध कर देती है। इन प्रतिमाओं के पीछे रची गई सरल किंतु अर्थपूर्ण पृष्ठभूमि – शंकर-पार्वती पर पुष्पवर्षा और मध्य में विराजमान सुदर्शनधारी भगवान विष्णु – संपूर्ण वातावरण को और अधिक दिव्य बना देती है। विशेष उल्लेखनीय यह है कि जहाँ अन्य स्थानों पर भव्य सजावट और अत्यधिक खर्च पर जोर दिया जाता है, वहीं सिंधी कॉलोनी मंडल ने इस वर्ष मूर्तियों की यथार्थवादी सजावट और भावपूर्ण प्रस्तुति पर अधिक ध्यान केंद्रित किया है। कलाकार ने अपनी कला, संवेदनाएँ और आत्मा मूर्तियों में उड़ेल दी है, जिससे हर दर्शनार्थी को अद्भुत सजीवता का अनुभव होता है। शहर में सुंदर मूर्तियों की कोई कमी नहीं है, लेकिन भक्ति और जीवंतता का अद्वितीय संगम केवल सिंधी कॉलोनी दुर्गोत्सव में ही अनुभव किया जा सकता है।
इसी कारण सभी वणीकर नागरिकों और भक्तों से श्री.सिंध सेवा दुर्गोत्सव मंडल के अध्यक्ष दिपक चावला, उपाध्यक्ष दिपेश वाधवाणी ,कोषाध्यक्ष सन्नी तारुणा एव सचिव अजय नागदेव की ओर से आवाहन किया जा रहा है कि,वे अवश्य सिंधी कॉलनी में आकर देवी के दर्शन करें.

