Ajay Kandewar,Wani : तहसील के लालपुलिया परिसर में कथित कोयला मिक्सिंग के कारोबार को लेकर अब कई गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। एक तरफ कोयला प्लॉटों के खिलाफ आंदोलन, उपोषण और शिकायतों का दौर जारी है, तो दूसरी तरफ कळमना रोड,मेघदूत कॉलोनी से लेकर निंबाला फाटा तक यवतमाल मार्ग पर स्थित कई कोयला प्लॉटों में कामकाज जोरों पर होने की चर्चा है। विशेष रूप से चिखलगाव लालपुलिया परिसर में कार्रवाई की मांग उठ रही है, लेकिन सवाल यह है कि क्या प्रशासन की नजर केवल छोटे कारोबारियों तक ही सीमित है? आखिर इस कथित कारोबार के पीछे बैठे बड़े मगरमच्छों तक कार्रवाई का शिकंजा कब पहुंचेगा? आंदोलन और उपोषण की शिकायतों के बावजूद यदि कोयला प्लॉटों पर गतिविधियां जारी हैं, तो इसके पीछे कौन-सी ताकत काम कर रही है?
रैक पॉइंट पर घटिया कोयला आखिर आया कैसे?
वणी लालपुलिया कोयला मिक्सिंग के कथित कारोबार में सबसे बड़ा सवाल रैक पॉइंट पर पहुंचने वाले कोयले की गुणवत्ता को लेकर है। खदान से निकलने वाले कोयले का दर्जा क्या होता है? रैक पॉइंट पर उसकी गुणवत्ता की जांच कौन करता है? वणी परिसर में उकनी खदान के कोयले को लेकर भी चर्चाएं हो रही हैं। आखिर अच्छी गुणवत्ता वाला कोयला किस प्लॉट पर पहुंचता है और कथित तौर पर घटिया कोयले का आगे क्या किया जाता है? यदि कोयले की गुणवत्ता में मिलावट या मिक्सिंग कर उसकी बिक्री की जा रही है, तो यह केवल कारोबार का मामला नहीं, बल्कि संबंधित व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़ा करता है। रैक पॉइंट से लेकर कोयला प्लॉट तक की पूरी आपूर्ति श्रृंखला की जांच होना आवश्यक है।
5 हजार का माल 8 हजार में? ‘पॉकेट’ का खेल किसका?
वणी लालपुलिया के कोयला मार्केट में इन दिनों चर्चा है कि खदान से लगभग 5 हजार रुपये के भाव से आने वाले कोयले को कथित मिक्सिंग के बाद 8 हजार रुपये तक के भाव में बेचा जा रहा है। यदि यह चर्चा सही है, तो सवाल उठता है कि इस पूरे कारोबार में आखिर कितना मुनाफा कमाया जा रहा है? कोयले की गुणवत्ता में बदलाव कर उसकी कीमत बढ़ाई जाती है क्या? और सबसे महत्वपूर्ण सवाल इस कथित कारोबार में किसका ‘पॉकेट’ भर रहा है? हालांकि, इन दरों और कथित आर्थिक व्यवहारों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। ऐसे में संबंधित प्लॉटों के दस्तावेज, कोयले की गुणवत्ता, वजन और बिक्री के रिकॉर्ड की जांच आवश्यक है।
छोटे कारोबारियों का बेहाल, बड़े मगरमच्छों को अभयदान?
कोयला प्लॉटों के खिलाफ शिकायतें, उपोषण और आंदोलन जारी होने के बावजूद यदि कुछ स्थानों पर कामकाज धड़ल्ले से चल रहा है, तो प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठना स्वाभाविक है। क्या कार्रवाई केवल सड़क पर दिखाई देने वाले छोटे कारोबारियों तक ही सीमित है? क्या बड़े कोयला प्लॉट संचालकों की गतिविधियों की भी जांच हो रही है? मेघदूत कॉलोनी से निंबाला फाटा तक के कोयला प्लॉटों की वास्तविक स्थिति सामने आनी चाहिए। आखिर कोयले की गुणवत्ता, मिक्सिंग, परिवहन और बिक्री के कथित खेल में कौन-कौन शामिल है, इसका खुलासा होना जरूरी है।
लालपुलिया ऊस बडे बडे प्लॉट मे में ‘फुल्ल छन्नी… फुल्ल मिक्सिंग’ की चर्चाओं के बीच अब प्रशासन को केवल शिकायतों पर औपचारिक कार्रवाई करने के बजाय वास्तविक जांच करनी होगी। रैक पॉइंट पर कोयले की गुणवत्ता की जांच, खदान से प्लॉट तक के दस्तावेज, वजन की पड़ताल और बिक्री के रिकॉर्ड खंगाले जाने चाहिए। यदि कहीं अनियमितता पाई जाती है, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिएआंदोलन करने वालों की आवाज सुनना जरूरी है, लेकिन उससे भी जरूरी है कि कोयले के कथित कारोबार में शामिल बड़े मगरमच्छों तक जांच पहुंचे। आखिर लालपुलिया के कोयला कारोबार में सच क्या है यह सवाल अब प्रशासन के सामने खड़ा है। “आंदोलन गया….**** हम काम करेंगे जोरो मे ” ऐसें जोरो से चर्चा शूरू हैं.

