Ajay Kandewar, Wani :- वणी शहर में एक ओर जहां सड़क दुर्घटना ने एक परिवार से उसका जवान बेटा छीन लिया, वहीं उसी परिवार ने अपने साहस और मानवता से पूरे समाज के सामने एक प्रेरणादायी उदाहरण पेश किया है। दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए सूरज कवडूजी चावला का नागपुर में इलाज के दौरान निधन हो गया। लेकिन अपने बेटे और पति को खोने के गहरे दुःख के बीच भी सूरज की पत्नी, भाई दीपक चावला और पूरे परिवार ने मिलकर अवयवदान का ऐतिहासिक निर्णय लिया, जिससे कई जरूरतमंदों को नया जीवन मिल सकेगा।
मिली जानकारी के अनुसार, वणी के मुकुटबन मार्ग पर एक अज्ञात चारपहिया वाहन ने सूरज चावला को जोरदार टक्कर मार दी थी। इस हादसे में उनके सिर पर गंभीर चोट आई और दिमाग में अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा। गंभीर हालत में उन्हें तुरंत नागपुर रेफर किया गया, जहां नागपुर के IRAA हॉस्पिटल में उनका उपचार शुरू हुआ। डॉक्टरों ने काफी प्रयास किए, लेकिन सिर में गंभीर चोट और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण आखिरकार सूरज को मृत घोषित कर दिया गया।इस दुखद घड़ी में जहां परिवार शोक में डूबा हुआ था, वहीं सूरज की पत्नी, उनके भाई दीपक चावला और अन्य परिजनों ने आपस में विचार-विमर्श कर अवयवदान का महान निर्णय लिया और डॉक्टरों को लिखित सहमति दे दी। परिवार के इस फैसले से अब सूरज के अवयव किसी जरूरतमंद व्यक्ति के शरीर में नई जिंदगी बनकर धड़केंगे। यह निर्णय न केवल मानवता की मिसाल है, बल्कि समाज को “अवयवदान ही श्रेष्ठदान” का मजबूत संदेश भी देता है।अवयवदान की प्रक्रिया पूरी होने के कारण सूरज चावला का पार्थिव शरीर एक दिन की देरी से, 7 मार्च की सुबह वणी लाया जाएगा।
इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में चावला परिवार के साहस और संवेदनशीलता की सराहना हो रही है। लोग कह रहे हैं कि बेटे और पति को खोने के बावजूद परिवार ने जो निर्णय लिया, वह समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।सूरज चावला आज भले ही इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके अवयवों के माध्यम से वे कई लोगों के जीवन में नई रोशनी बनकर हमेशा जीवित रहेंगे। सच मायनों में चावला परिवार ने यह साबित कर दिया कि मानवता और सेवा का रास्ता सबसे महान होता है।

