Ajay Kandewar,Wani :- शनिवार रात तहसील के बेलोरा रेत घाट से चौंकाने वाली जानकारी सामने आ रही है। नियमों के अनुसार जहाँ दिन में केवल सीमित और नियंत्रित उत्खनन की अनुमति है, वहीं बताया जा रहा है कि दिन में दिखावटी गतिविधियाँ और रात के अंधेरे में पूरे पैमाने पर अवैध खुदाई की जा रही है। विशेष रूप से घरकुल लाभार्थियों के नाम पर दिन में औपचारिकता निभाई जा रही है, जबकि वास्तविक खेल रात में चल रहा है।
सबसे गंभीर और चौंकाने वाली बात यह है कि घाट पर पोकलेन मशीन के जरिए बेधड़क रेत उत्खनन किए जाने की विश्वसनीय चर्चा जोरों पर है। नियम स्पष्ट हैं कि इस घाट पर पोकलेन जैसी भारी मशीनों से उत्खनन की अनुमति नहीं है, इसके बावजूद मशीनें सीधे घाट में उतारी जा रही हैं। सवाल यह है कि यह सब किसकी शह पर हो रहा है? क्या मंडल अधिकारी को इसकी भनक तक नहीं, या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं?
लगातार खबरें प्रकाशित होने के बाद भी मंडल अधिकारी द्वारा घाट का निरीक्षण न किया जाना कई शंकाओं को जन्म दे रहा है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा आम है कि अधिकारी मानो “गहरी नींद” में हैं। शनिवार-रविवार को प्रशासनिक निगरानी ढीली पड़ते ही रेत तस्करों की “मौज” शुरू हो जाती है और बेलोरा घाट अवैध उत्खनन का केंद्र बन जाता है।
मुजोर मंडळ अधिकारी not answerable…….
“इस मामले में अब एक और गंभीर चर्चा गांवभर में जोर पकड़ रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब भी मंडल अधिकारी को फोन कर अवैध उत्खनन की जानकारी देने की कोशिश की जाती है, तो कॉल अनुत्तरित रहते हैं। इतना ही नहीं, गांव में यह भी चर्चा आम है कि शिकायत करने वाले लोगों को “ब्लैकलिस्ट” में डालने का भय दिखाया जाता है। इस कथित रवैये के कारण कई ग्रामीण खुलकर सामने आने से कतरा रहे हैं।स्थानीय स्तर पर इसे लेकर “आकीब की मौज” और “सचिन की मज्जाच मजा” जैसी चर्चाएं हो रही हैं, जो इस पूरे अवैध कारोबार की ओर इशारा करती हैं। दिन में नियमों का दिखावा और रात में खुलेआम खुदाई—यह सब बिना किसी संरक्षण के संभव नहीं माना जा रहा।

