Ajay Kandewar,Wani:- वणी तहसिल के शिरपूर पोलिस अंतर्गत बेलोरा घाट में खुलेआम हो रहे पोकलेन मशीन से अवैध रेत उत्खनन ने वणी तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर संदेह पैदा कर दिया है। जिस घाट पर नियमों के अनुसार सख्त निगरानी होनी चाहिए थी, वहीं भारी मशीनरी का इस्तेमाल प्रशासन की चुप्पी को उजागर करता है।
व्हिडिओ देखो….☝️
तथाकथित व्हिडिओ के आधार पर सबसे बड़ा सवाल यही है कि पोकलेन मशीन घाट तक पहुँची कैसे? क्या तहसीलदार और मंडल अधिकारी बिना जानकारी के इतने बड़े स्तर पर उत्खनन होने दे सकते हैं? अगर जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई, और अगर नहीं थी तो यह सीधी लापरवाही नहीं तो और क्या है? वीडियो सामने आने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों का मौन कई संदेहों को जन्म दे रहा है।सबसे गंभीर आरोप यह है कि यह सब तहसीलदार की जानकारी के बिना संभव ही नहीं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि रेत तस्करों को संरक्षण, ढिलाई और मौन सहमति मिली हुई है। क्या तहसीलदार सिर्फ कुर्सी पर बैठे दर्शक बने रहे, या फिर कानून को दरकिनार करने वालों के लिए रास्ता साफ किया गया? पोकलेन जैसी मशीन का घाट तक पहुँचना प्रशासनिक मिलीभगत के बिना कैसे संभव हुवा यह सवाल अब आम जनता पूछ रही है।तहसील प्रशासन की खामोशी ने आरोपों को और गहरा कर दिया है। शिकायतें, संकेत और अब वीडियो सब कुछ सामने होने के बावजूद कार्रवाई का अभाव यह दर्शाता है कि नियमों को जानबूझकर कुचला गया। आरोप है कि तहसीलदार ने अपने कर्तव्य से मुंह मोड़कर रेत माफियाओं को खुली छूट दी, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान और कानून की साख को चोट पहुँची।
अब स्पष्ट मांग उठ रही है कि बेलोरा घाट का लिलाव तत्काल रद्द किया जाए और वीडियो के आधार पर सख्त कार्रवाई हो। ETS माप कर चोरी का मामला दर्ज हो, जिम्मेदार अधिकारियों की निष्पक्ष जांच हो और रेत तस्करों पर ऐसी कार्रवाई की जाए कि पूरे तालुके में साफ संदेश जाए—कानून से ऊपर कोई नहीं। अब ऐसा कहा जा रहा है की,यवतमाल जिल्हाधिकारी ने स्वयं बेलोरा घाट की जाँच करनी चाहिए. तब दूध का दुध पाणी का पाणी बाहर आएगा.

