Tuesday, February 17, 2026
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अब एक नहीं, दो-दो पोकलेन से बेलोरा घाट में रेत का अवैध उत्खनन…….?

Ajay Kandewar,Wani :- तहसिल के बेलोरा घाट में अवैध रेत उत्खनन अब छिपा नहीं रहा। जानकारी और स्थानीय नागरिकों की शिकायतों के अनुसार, यहां अब एक नहीं बल्कि दो-दो पोकलेन मशीनों से बड़े पैमाने पर रेत की खुदाई की जा रही है। मशीनों द्वारा बनाए गए विशाल और गहरे गड्ढे यह सवाल खड़ा करते हैं कि आखिर इतने खुलेआम हो रहे इस अवैध कारोबार पर तहसील प्रशासन की नजर क्यों नहीं पड़ रही?स्थानीय मजदूरों और ग्रामीणों का कहना है कि बेलोरा घाट क्षेत्र में रात मशीनें चल रही हैं, लेकिन किसी प्रकार की शासकीय कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या तहसीलदार इस स्थिति का जवाब देंगे?

बाहेरगांव की रॉयल्टी, रेत वणी में — नियमों की खुली अवहेलना

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बाहेरगांव क्षेत्र की रॉयल्टी पर निकाली गई रेत वणी क्षेत्र में बेधड़क लाई जा रही है। यदि यह सत्य है, तो यह सीधे-सीधे खनिज नियमों का उल्लंघन है। संबंधित विभागों की भूमिका पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े हो रहे हैं।

‘लक्ष्मी दर्शन’ के बाद छोड़ा गया रेत से भरा हाईवा — कौन है वह तलाठी?

रेत से भरे एक हाईवा को कथित रूप से ‘लक्ष्मी दर्शन’ के बाद छोड़ दिए जाने की चर्चा क्षेत्र में जोर पकड़ रही है। सवाल यह है कि वह कौन सा तलाठी है जिसने नियमों की अनदेखी करते हुए आंखें मूंद लीं?यदि यह मामला सत्य है, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि सीधी मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

रात में बेलोरा घाट की सुरक्षा किसके भरोसे?

दिन ढलते ही बेलोरा घाट में अवैध गतिविधियां तेज हो जाती हैं। ऐसे में यह बड़ा सवाल है कि रात के समय घाट की सुरक्षा किसके जिम्मे है?पुलिस और महसूल विभाग की गश्त यदि सक्रिय होती, तो क्या यह अवैध उत्खनन संभव हो पाता?

मंडल अधिकारी के निजी वाहन में तस्कर? गंभीर चर्चा.

क्षेत्र में यह भी जोरदार चर्चा है कि एक मंडल अधिकारी के निजी वाहन में बैठकर रेत तस्कर के साथ आवाजाही की गई। यदि इसकी निष्पक्ष जांच होती है, तो कई परतें खुल सकती हैं।इसी कड़ी में लोगों के बीच यह कटाक्ष भी चर्चा में है —.

दिन में शासन का पगार, रात में खिसा गरम....

हालांकि यह चर्चा है, लेकिन प्रशासन को इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।सीसीटीवी कैमरे: दिखावे के लिए या कार्रवाई के लिए?रेत तस्करी रोकने के उद्देश्य से पुलिस द्वारा लगाए गए सीसीटीवी कैमरे वास्तव में काम आएंगे या केवल औपचारिकता बनकर रह जाएंगे?यदि कैमरे होते हुए भी अवैध उत्खनन जारी है, तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। परमिट जांच समिति गठित करने की जोरदार मांग इस पूरे प्रकरण को देखते हुए अब यह अनिवार्य हो गया है किबेलोरा घाट में हो रहे अवैध रेत उत्खनन की दो पोकलेन मशीनों की संबंधित तलाठी व अधिकारियों की भूमिका की तथा रॉयल्टी और परिवहन की

परमिट की स्वतंत्र जांच समिति गठित कर निष्पक्ष जांच कराई जाए।

जब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक बेलोरा घाट में हो रही यह लूट शासन के राजस्व और कानून व्यवस्था दोनों पर सीधा प्रहार करती रहेगी।अब सवाल सिर्फ रेत का नहीं, बल्कि प्रशासन की जवाबदेही का है।

राज्य के मंत्री बावनकुळे के निर्देशो की ” ऐसी की तैसी….”

बेलोरा घाट प्रकरणात यह भी चर्चा का विषय बनता जा रहा है कि राज्य के मंत्री बावनकुळे के स्पष्ट निर्देशों का पालन प्रशासन द्वारा नहीं किया जा रहा है। बेलोरा घाट में जिस प्रकार खुलेआम अवैध रेत उत्खनन जारी है, उससे यह तस्वीर सामने आती है कि मंत्री महोदय के आदेश कागजों तक ही सीमित रह गए हैं। इसी कारण जनमानस में यह मांग जोर पकड़ रही है कि इस गंभीर मामले में जिला खणीकर्म विभाग तथा जिलाधिकारी स्वयं संज्ञान लेकर बेलोरा घाट की निष्पक्ष और गहन जांच कराएं, ताकि सच्चाई सामने आ सके और जिम्मेदारी तय हो सके।

 

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