Ajay,Wani : वणी तहसिल के राजूर गांव की सड़कों की खराब हालत और गड्ढों के कारण लोग काफी परेशान थे। गांव में 17 सदस्यों की ग्राम पंचायत, कई बड़े और अनुभवी नेता तथा WCL जैसी बड़ी संस्था होने के बावजूद सड़कों की मरम्मत नहीं हो रही थी। हालात ऐसे हो गए थे कि सड़क के गड्ढे भरने के लिए लोगों को चंदा इकट्ठा करना पड़ रहा था, जिससे ग्रामीणों में नाराज़गी थी।
ऐसे समय में युवा नेता फैजल बशीर खान ने किसी का इंतजार नहीं किया और खुद आगे आकर गांव के गड्ढे भरवाने का फैसला किया। उन्होंने अपने खर्च से हजारों रुपये खर्च किए। गड्ढे भरने के लिए लगने वाला मटेरियल, ट्रांसपोर्ट और मजदूरों का पूरा खर्च उन्होंने खुद उठाया। इससे गांव के लोगों को काफी राहत मिली।ग्रामीणों का कहना है कि इतनी बड़ी ग्राम पंचायत और कई बड़े नेताओं के रहते हुए भी एक युवक को खुद आगे आकर काम करना पड़ा। यह कई सवाल खड़े करता है। लोगों का कहना है कि फैजल बशीर खान ने सिर्फ वादे नहीं किए, बल्कि काम करके दिखाया और यही असली नेतृत्व की पहचान है।
फैजल बशीर खान, स्वर्गीय बशीर खान के पुत्र हैं। स्वर्गीय बशीर खान ने अपने पूरे जीवन में राजूर क्षेत्र के आम लोगों के लिए काम किया और समाज सेवा की अलग पहचान बनाई। अब उनके बाद उनके बेटे फैजल बशीर खान उसी समाज सेवा की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं, ऐसा कई ग्रामीणों का कहना है।स्वर्गीय बशीर खान राजूर क्षेत्र के वरिष्ठ समाजसेवी और प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने हमेशा आम लोगों की समस्याओं के लिए संघर्ष किया और समाज के हित में लगातार काम किया। अब उनके बेटे फैजल बशीर खान उसी रास्ते पर चल उनका नाम कमा रहे हैं, ऐसी भावना लोगों ने व्यक्त की है.
ऐसे युवा नेता का सम्मान होना चाहिए…..
ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत, स्थानीय प्रशासन और गांव के वरिष्ठ नेताओं को इस सामाजिक कार्य की सराहना करनी चाहिए। बिना किसी पद के अपने पैसे से गांव के लिए काम करने वाले इस युवक का सार्वजनिक सम्मान किया जाना चाहिए, ताकि ऐसे सामाजिक कार्यों को बढ़ावा मिले।

