Wani:- शासन को करोड़ों का चूना लगाने वाले रेत माफियाओं के खिलाफ लगातार खबरें प्रकाशित करना अब पत्रकार अजय कंडेवार को भारी पड़ता दिख रहा है। रेत तस्करी उजागर होते ही उन्हें लगातार धमकी भरे फोन कॉल आ रहे हैं, जिससे साफ है कि माफिया अब बेखौफ हो चुके हैं।सबसे गंभीर सवाल यह है कि वणी तहसील प्रशासन आखिर किसके इशारे पर चुप बैठा है? अवैध उत्खनन, पोकलेन से खुदाई और खुलेआम रेत की चोरी के बावजूद कार्रवाई न होना प्रशासन की मिलीभगत की ओर सीधा इशारा करता है। इसी संरक्षण के चलते रेत तस्कर खबरें लिखने वालों को हल्के में लेने लगे हैं।
पत्रकार अजय कंडेवार ने दो टूक कहा है कि धमकियों से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि धमकी देने वालों के कॉल रिकॉर्ड, नाम और पूरी जानकारी लिखित रूप में सुरक्षित रखी गई है। यदि उन्हें या उनके परिवार को कुछ भी होता है, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों के सबूत पहले से मौजूद हैं।अब चेतावनी साफ है.यदि पुलिस और प्रशासन ने इस मामले को तत्काल गंभीरता से नहीं लिया, तो यह पूरा मामला अमरावती आईजी, यवतमाल एसपी और जिलाधिकारी तक पहुंचाया जाएगा। सवाल सिर्फ एक पत्रकार का नहीं, बल्कि शासन की लूट, कानून की साख और प्रशासन की जवाबदेही का है।
•प्रशासन आखिर किसके साथ खड़ा है?
जब खुलेआम रेत तस्करी जारी है, पोकलेन मशीनें दिन-दहाड़े चल रही हैं, तब राजस्व विभाग और पुलिस तंत्र आंखें मूंदकर क्यों बैठा है?स्थानीय स्तर पर यह सीधा आरोप लगाया जा रहा है कि प्रशासन की भूमिका “रेत निकालो, हम देख लेंगे” जैसी हो गई है। इसी ढुलमुल और संरक्षण देने वाली नीति के कारण रेत तस्कर और ज्यादा बेलगाम हो गए हैं और शासन के राजस्व पर दिन-दहाड़े डाका डाला जा रहा है।
धमकियों के आगे न झुकने का ऐलान…
पत्रकार अजय कंडेवार ने दो टूक शब्दों में साफ किया है कि,“शासन की लूट रोकने के लिए खबरें लिखता रहूंगा। दबाव हो या धमकियां से मैं डरने वाला नहीं हूं।”उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि उन्हें या उनके परिवार के किसी सदस्य को कोई भी नुकसान पहुंचता है, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों के नाम और ठोस सबूत पहले से डायरी , कॉल डिटेल्स, कॉल रेकॉर्डस सुरक्षित रखे गए हैं। जो मिलने आये थे कुछ पंटर उन्से भी मुझे डर नहीं…...
मामला पहुंचेगा सीधे वरिष्ठ अधिकारियों तक.,…
अजय कंडेवार ने चेतावनी दी है कि यदि इस पूरे मामले को प्रशासन ने तुरंत गंभीरता से नहीं लिया, तो धमकियों, कॉल रिकॉर्ड और संबंधित नामों के साथ यह पूरा प्रकरण लिखित रूप में अमरावती के आईजी, यवतमाल के पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी तक निश्चित रूप से पहुंच चुकाi

