Ajay Kandewar,Wani:- तालुका क्षेत्र का हमेशा विवादों में रहने वाला बेलोरा घाट एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। यहां सुबह से शाम ही नहीं बल्कि रातभर दो-दो पोकलेन मशीनों से बेधड़क रेती निकासी और हाईवे भराई का काम चल रहा है। ट्रिप पर ट्रिप निकल रही हैं, लेकिन इसके बावजूद तहसील प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही। इसी वजह से अब आम जनता में यह चर्चा खुलकर होने लगी है कि क्या इस पूरे अवैध कारोबार को तहसीलदार का मौन आशीर्वाद प्राप्त है।
बेलोरा घाट में इस समय “रंगा और पंखा” की जोड़ी का दबदबा सबसे ज्यादा चर्चा में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि घाट पर चल रहा पूरा खेल इन्हीं के इशारों पर हो रहा है और किसी को भी इनके खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं है। हालात ऐसे बन गए हैं कि खुलेआम चर्चा है की, बेलोरा घाट को अब लोग व्यंग्य में ‘लक्ष्मी दर्शन का घाट’ कहने लगे हैं, जहां अवैध कमाई की बरसात हो रही है।
घाट क्षेत्र में बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं, जो प्रशासन की लापरवाही की गवाही दे रहे हैं। इन गड्ढों से न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है, बल्कि भविष्य में बड़े हादसों का खतरा भी बढ़ गया है। इसके बावजूद सवाल यह उठ रहा है कि क्या ये गड्ढे तहसीलदार और संबंधित मंडल अधिकारियों को दिखाई नहीं देते, या फिर जानबूझकर सब कुछ अनदेखा किया जा रहा है—इस पर जनता में तीखी बहस चल रही है।
दिन-रात जारी इस अवैध गतिविधि के चलते अब लोगों का सब्र टूटता नजर आ रहा है। नागरिकों का कहना है कि तहसील प्रशासन पूरी तरह निद्रावस्था में है और वरिष्ठ अधिकारी भी चुप्पी साधे बैठे हैं। इसी पृष्ठभूमि में आने वाले समय में बड़े जनआंदोलन की तैयारी शुरू हो चुकी है। अगर जल्द ही सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो बेलोरा घाट का मामला सिर्फ अवैध रेती उत्खनन का नहीं, बल्कि प्रशासनिक निष्क्रियता का बड़ा उदाहरण बनकर सामने
(टीप:- सदर बातमीत AI इमेज घेण्यात आले.).

