Ajay Kandewar,Wani :- तहसील के बेलोरा रेत घाट को लेकर इन दिनों गंभीर आरोपों की चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि आखिर नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? आरोपों के केंद्र में जिला खनिकर्म अधिकारी संजय जोशी और वणी के तहसीलदार निखिल धुळधर का नाम लिया जा रहा है। पर्यावरण की रक्षा की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर है, उन्हीं पर आंख मूंद लेने के आरोप लग रहे हैं।
बताया जा रहा है कि बेलोरा घाट पर दिन-रात पोकलेन मशीनों से रेत उत्खनन किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर कथित वीडियो भी वायरल हो रहे हैं, जिनमें भारी मशीनों से बड़े पैमाने पर उत्खनन दिखाई दे रहा है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कई बार शिकायतें और सबूत संबंधित विभागों तक पहुंचाए गए, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई। ऐसे में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि क्या नियमों को ताक पर रखकर कोई “सेटिंग” की गई है?कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि बिना वैध अनुमति, तय सीमा से अधिक या मशीनों के माध्यम से रेत उत्खनन किया जा रहा है, तो यह खनिज नियमों और पर्यावरण संबंधी प्रावधानों का उल्लंघन हो सकता है। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होती है। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि जिला खनिकर्म विभाग को सभी तथ्यों की जानकारी दी गई थी, तो फिर निरीक्षण और कार्रवाई में देरी क्यों हुई?
अब मांग उठ रही है कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए और यदि कहीं नियमों का उल्लंघन या प्रशासनिक लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदारों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। बेलोरा रेत घाट का मुद्दा अब स्थानीय स्तर से निकलकर उच्च स्तर तक पहुंचने की चर्चा में है। जनता की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सच्चाई सामने आएगी और क्या कानून की कसौटी पर सभी की भूमिका की जांच होगी।
लक्ष्मी दर्शन” और “सेटिंग” जैसी चर्चाएं
किसी भी प्रकार का अवैध खनन राजस्व हानि के साथ-साथ पर्यावरणीय क्षति का कारण बनता है। ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारियों पर यह दायित्व बनता है कि वे तत्काल स्थल निरीक्षण कर कठोर कार्रवाई करें। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो यह प्रशासनिक लापरवाही या संभावित मिलीभगत की आशंका को जन्म देता है। यही कारण है कि “लक्ष्मी दर्शन” और “सेटिंग” जैसी चर्चाएं आमजन के बीच फैल रही हैं।

