Ajay Kandewar,Wani:- बेलोरा रेती घाट को लेकर एक बार फिर गांव-शहर में खलबली मच गई है। रविवार की रात बड़े पैमाने पर खुदाई (उपसा) होने की प्रबल आशंका जताई जा रही है। सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं के मुताबिक, घाट के आसपास एक पोकलेन मशीन पहले से तैयार रखी गई है, जो देर रात 11:30 बजे से लेकर 1:30–2:00 बजे के बीच सक्रिय होने की बात कही जा रही है।स्थानीय नागरिकों में यह चर्चा जोरों पर है कि संबंधित पोकलेन को दिनभर एक वेकोली एरिया में छिपाकर रखा जाता है और अंधेरा होते ही उसे बेलोरा घाट में उतारकर रेती का उपसा किया जाता है। हालांकि प्रशासन की ओर से अब तक इस पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आई है, पर एक कारवाई बेलोरा घाट से अवैध रेती का टिपर पकडा गया ऐसी जाणकारी प्राप्त हुइ है . मगर एक बात समज नहीं वेकोली के OB इस्तेमाल नदी में वाहन चलाने के लिये क्यो? यह सबसे बडा सवाल है.
सबसे अहम सवाल यह है कि —क्या मंडल अधिकारी इस पूरी गतिविधि से अनजान हैं?और यदि जानकारी है, तो क्या यह तहसीलदार की मौन-स्वीकृति (मूकसंमती) मानी जाए? शनिवार,रविवार जैसे अवकाश के दिन, जब प्रशासनिक निगरानी अपेक्षाकृत कम होती है, तब इस प्रकार की संभावित गतिविधि नियमों की गंभीर अवहेलना की ओर इशारा करती है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह अवैध रेती उपसा पर्यावरण के साथ-साथ शासन की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा करेगा।
अब निगाहें मंडल अधिकारी और तहसीलदार कार्यालय पर टिकी हैं।क्या शनिवार और रविवार रात बेलोरा घाट पर निगरानी रखी जाएगी?या फिर हर बार की तरह, सब कुछ “अनदेखा” कर दिया जाएगा?प्रशासन की निष्क्रियता यदि इसी तरह जारी रही, तो यह मामला आने वाले दिनों में बड़े आंदोलन और उच्चस्तरीय जांच की मांग तक पहुंच सकता है।
राजस्व विभाग की कारवाई.
संग्रहित फोटो
वणी विभाग की ओर से एक रेती का टिपर पकडा गया पर उसके कागजाद की पूरी जाँच होना चाहिए. वाहन मालक पर कारवाई या चालक पर चोरी का गुन्हा दाखल होगा. ये देखणे वाली बात रहेगी...


